दरभंगा के बेनीपुर प्रखंड के "नवादा" आएंगे तो चौंक जाएंगे क्योंकि इस गाँव में एक दिन पूर्व दीपावली मनायी जाती है. पटाखों की आवाज में गाँव के बच्चे झूमते नजर आते हैं. यानी मुख्य दीपावली से 1 दिन पहले ही गाँव के लोग घरों को पूरी तरह से सजा-सवांर लेते हैं. शाम में गांव रोशनी से जगमगाता हुआ मिलता है.

एक दिन पूर्व से हि दीपावली मनाने के पीछे क्या है ऐतिहासिक प्रमाण

इस गांव में 1 दिन पूर्व अर्थात कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को दीपावली मनाने की परंपरा रही है. बाल्मीकि रामायण के अनुसार शिव का हनुमत अवतार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था, हनुमान अंजनी के पुत्र थे इसलिए मिथिला नरेश के दरबार में इस तिथि को दीपावली मनाई जाती थी. मिथिला के राजा से नवादा गांव के शकुनय बंश के जमींदारों के जिम्मेदारों के बीच अच्छे संबंध थे जिस कारण नवादा गांव में राज दरबार के साथ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई.

कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपजलाकर महालक्ष्मी  की पूजा की जाती है.  कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को श्रीकृष्ण के द्वारा  नरकासुर का बध कर बंदी कन्याओं को मुक्त कराने  के कारण मिथिला नरेश की ओर से उस दिन को विजयोत्सव  के रूप में मनाया जाता है.

एक ऐतिहासिक प्रमाण यह भी है कि

अलबर्दी खां को नरेश ने हराया था वर्ष 1745 में अलबर्दी खां और बबरजंग के बीच कन्दरपिघाट में युद्ध हुआ जिसमें मिथिला नरेश नरेंद्र सिंह ने अलबर्दी खां की मदद की. इस युद्ध में  अलबर्दी खां विजयी हुए. और तिरहुत को कर मुक्त कर दिया गया. बाद में वर्ष 1753 में  अलबर्दी खां के सूबेदार रामनारायण ने 5000 सैनिकों के साथ नरेंद्र सिंह के राज़ पर आक्रमण कर दिया यह युद्ध 5 से 7 अक्टूबर तक हरिना गांव में हुआ मिथिला नरेश की जीत हुई इस दिन से कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को विजय दिवस के रूप में विजयोत्सव मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई. नवादा गांव के जमींदार राजा के बड़े हसबगाह थे और साथ-साथ इस तिथि  को दीपावली मनाने लगे .जमींदारों की 1 दिन पूर्व गांव में और दूसरे दिन अपने मौजे पर जाकर दीपावली मनाने की परंपरा स्थापित हुई.


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