दरभंगा : नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष रफीउद्दीन ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बताया धोखा - BENIPUR NEWS

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Tuesday, 3 October 2017

दरभंगा : नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष रफीउद्दीन ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बताया धोखा



रभंगा : गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक धोखा - रफीउद्दीन
  ए सिद्दीकी की रिपोर्ट
     
          एडिटिंग - एम राजा 
            दरभंगा : बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष रफीउद्दीन ने  संबंधित  पदाधिकारी एवं सरकार पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि सत्र 2017 - 18 में प्रारंभिक विद्यालयों में पुस्तक नहीं मिलने पर बच्चों के भविष्य पर प्रश्न उठाते हुए आगे उन्होंने कहा कि बिहार के करोड़ों बच्चों के भविष्य के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है । बच्चों को पुस्तक नहीं मिलने पर कोर्ट में बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ द्वारा एक मामला भी दर्ज किया गया है जिसको लेकर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए ऐसी हरकत को शर्मनाक बताया वहीं आगामी 5 अक्टूबर 2017 से परीक्षा लेने की ढोंग सरकार  द्वारा की जा रही है। वहीं सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात तो कह रही है पर क्या यही है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जहां परीक्षा के समय तक भी बच्चों के हाँथ में पुस्तक ही नही पहुंच पाती ऐसी स्थिति में बिहार के शिक्षा का ग्राफ का आलम क्या होगा।सरकार को सिर्फ वोटर बनाने की ही पड़ी है तो वहीं अभिभावको की अगर माने तो अब अभिभावक भी जागते हुए दिख रहे हैं आगे अभिभावक राम शंकर यादव ने बताया की परीक्षा का डेट लगभग फाइनल होने को है लेकिन विद्यालय में पुस्तक नहीं मिलने से बच्चों के भविष्य की चिंता सताये जा रही है। जब इस संदर्भ में अलीनगर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अरविंद कुमार यादव से बात की गई तो उन्होंने चाय की दुकान पर होने की बात कह कर पुनः बात करने की बात कही लेकिन बात को टालते हुए लगभग उनका फोन स्विच ऑफ हो गया उसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया की पुस्तक की कमी तो है लेकिन सरकार इस पर विचार कर रही है और जल्द से जल्द उस कमी को दूर करने की बात कही। आगे जिला शिक्षा पदाधिकारी सुधीर कुमार झा ने बताया ये राज्य का मामला है पर जहां तक मुझे जानकारी है कि पुस्तक की कमी को जल्द दूर किया जाएगा।  फिलहाल उर्दू की किताब आ चुकी है लिस्ट मिलते ही विद्यालय को पुस्तक भेजा जाएगा। तो यह है हमारे बिहार के शिक्षा का हाल जहां परीक्षा होने तक बच्चों के हाथ में पुस्तक भी उपलब्ध नहीं हो पाती है ऐसे में बच्चे अपने भविष्य को कैसे संवार पाएंगें। क्या ये बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है ? यह एक सोचने का विषय है ।

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