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युवाओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा आनंदशाला का यह स्टॉल !


बिहार दिवस के तीनों दिन ‘बी’ ब्लॉक के 14 नंबर पंडाल में अनोखा नजारा था, जहां युवाओं और स्कूली बच्चों-बच्चियों की भीड़ उमड़ती रही। यह कोना ‘आनंदशाला’ का था, जो समस्तीपुर जिले में चलने वाला एक कार्यक्रम है और वहां के 20 प्रखंडों में 1000 सरकारी स्कूलों के साथ काम कर रहा है। ‘आनंदशाला’ क्वेस्ट अलायंस नामक एनजीओ का एक कार्यक्रम है, जो बिहार शिक्षा परियोजना के साथ मिलकर माध्यमिक शिक्षा तक के बच्चों को अभिनव तरीके से शिक्षा देने के क्षेत्र में काम कर रहा है। 

यहां बिहार-दिवस में लगे स्टॉल पर एक कोनें में लगातार आनंदशाला और माय क्वेस्ट की फिल्मों का प्रदर्शन हो रहा है, जो युवाओं के लिए बड़ा आकर्षण है। वहां माय क्वेस्ट के प्रोग्राम मैनेजर सुशांत पाठक युवाओं को जीवन-कौशल और कौशल विकास के बारे में चल रहे क्वेस्ट अलायंस के कार्यक्रमों की जानकारी देते हैं। दूसरे कोने में ‘आनंदशाला’ के बारे में जानकारी दी जा रही है। वहां आनंदशाला के प्रकाशन और पैंफलेट भी रखे गए हैं। इसके साथ ही, वहीं नबी हसन ऑरिगैमी के चमत्कार दिखा रहे हैं। उनके कोने में भी अच्छी खासी भीड़ बच्चों की उमड़ पड़ी है। 
 
आनंदशाला से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी हिमांशु हमें बताते हैं कि समस्तीपुर ज़़िले मे एक नए प्रयोग के तहत 'आनंदशाला शिक्षा रत्न पुरस्कार' देने की सोच आयी है। इस पुरस्कार की प्रक्रिया नवंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई और यह मार्च के अंतिम सप्ताह तक चलेगी, जिसके बाद चुनिंदा शिक्षकों और स्कूलों को अप्रैल माह में पुरस्कृत किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए इसे त्रि-स्तरीय रखा गया है औऱ इसमें ज़िले के शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इस समिति में खुद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीइओ) ही अध्यक्ष होते हैं। इसके साथ ही एक शिक्षाविद और जन-प्रतिनिधि को भी इसमें रखा गया है। 
 
आनंदशाला शिक्षा रत्न के लिए कुल मिलाकर 10 बेहतर अभ्यासों को पुरस्कृत किया जाना है। इसके लिए समस्तीपुर ज़िले के 20 प्रखंडों से नामांकन आए। फिलहाल, आनंदशाला की पूरी टीम पटना में बिहार दिवस के अवसर पर तीन दिनों के लिए समस्तीपुर ज़िले में आनंदशाला के माध्यम से किए जा रहे कामों को प्रदर्शित करने में जुटी है। 

पटना में क्वेस्ट अलायंस के स्टेट हेड अमिताव नाथ ने कहा, 'हम शिक्षा रत्न पुरस्कार के माध्यम से उस संस्कृति को फिर से लाना चाह रहे हैं, जहां अच्छे कामों के लिए हम प्रशंसा और बड़ाई करें। नकारात्मक बातें तो हम रोजाना ही अपने आसपास सुनते हैं, इसके माध्यम से हम थोड़ी सकारात्मकता बढ़ाना चाह रहे हैं।' बिहार दिवस में शिरकत करने के फैसले के पीछे भी कुछ यही कारण है। आनंदशाला के कार्यक्रम अधिकारी सुनील, जो इस पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, बताते हैं कि समस्तीपुर में आनंदशाला के माध्मय से जितना भी काम हो रहा है, उसे आगे तक बताना भी बेहद जरूरी है। वह उम्मीद करते हैं कि इन कामों से प्रभावित होकर अधिक से अधिक लोग आनंदशाला से जुड़ेंगे और उसको आर्थिक सहयोग भी प्रदान करेंगे।
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