गाँव की अदालत 

एक सर्वे के अनुसार माना गया है कि बिहार में हर महीने दर्ज होने वालों मुकदमो में से 58% मुकदमे ग्राम कचहरी में सुनवाई के लायक है । न्याय को सुलभ बनाने के लिए ग्राम कचहरी को भावदि की धारा 140, 142, 143, 145, 153, 160, 172, 174, 178, 179, 269, 277, 283, 285, 286, 289, 290, 294, 294 अ , 323, 334, 338, 341, 352, 356, 357, 358, 374, 403, 426, 428, 430, 447, 448, 502, 504, 506, 510, तथा 379, 380 के तहत सुनवाई और करवाई का अधिकार दिया गया है । बिहार पंचयात राज अधिनियम 2006 के अधीन सरपंच, उपसरपंच, और पंच को भादवि की धराओं के तहत 1000 रूपये तक के मामले की सुनवाई और एक हजार रुपया जुर्माना करने का अधिकार है ।

इस विषय पर माननीय मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार ने कहा है । की  "हमने थानों से ग्राम कचहरी को ट्रांसफर होने वाले मुकदमों के लिए एसपी को जिम्मेदार बनाया है । अगर 15 दिन में यह काम नहीं हुआ , तो यही माना जायेगा कि एसपी कानून को नहीं मान रहे हैं , अनदेखी कर रहें हैं । एसपी की जिम्मेदारी है कि वे ग्राम कचहरी के अधिकार , उसको सौपें जाने वाले मुकदमों के बारे में थाना प्रभारी , सब इंस्पेक्टर आदि को बताएं । निचली अदालतों से भी वेसे मामले ग्राम कचहरी को सौपें जायेंगे, जो ग्राम कचहरी के अधिकार क्षेत्र के दायरे में है । इसकी जिम्मेदारी विधि सचिव को दी गयी है । मामूली मार पीट या झगड़े के मामले भि थाने में पहुंच जाते हैं, अदालतों में चले जाते हैं । अगर ये सब कचहरी में ही निपट जाये , तो थाने और निचली अदालत पर मुकदमा का दवाव कम ही जायेगा । ये लोकसेवक हैं । मुझे भरोसा है कि बिहार की ग्राम कचहरी दुनियाँ भर् में उदाहरण पेश करेगी । पंचयात सरकार भवन में ग्राम कचहरी भी लगेगी ।"


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