शिक्षा में योग का महत्व ! - BENIPUR NEWS

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Friday, 1 July 2016

शिक्षा में योग का महत्व !


प्रिय पाठकों प्रस्तुत है योग से सम्बंधित आलेख शिक्षा में योग का महत्व ।वैज्ञानिक अविष्कारों के इस आधुनिक युग में जीवन को आराम मय बनाने के लिए असंख्य साधन है । परंतु कुछ लोग ही इस विलास सामग्री का आनंद ले पते हैं । यद्यपि यह बात एकदम उलटी लगती है । अस्वस्थता के कारण लोग प्रारब्ध में होते हुए भी सुख की जिंदगी नहीं जीते हैं । छात्र पठन-पाठन में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं । शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक संस्कृति के रूप में योगासनों का इतिहास समय की अनंत गहराइयो में छिपा हुआ है । मानव जाती के प्राचीनतम साहित्य वेदों में उनका उल्लेख मिलता है । वेद आध्यात्मिक ज्ञान के भंडार हैं । इनके रचेयता अपने समय के महान अध्यात्मिक व्यक्ति थे । कुछ लोगो का ऐसा भी विश्वास है की….. योग विज्ञान वेदों से भी प्राचीन हैं । ऐतिहासिक प्रमाण के आधार पर योगासनों के प्रथम व्य्ख्याकार महान योगी गोरखनाथ थे । 

इनके समय में योग विज्ञान लोगो में अधिक लोकप्रिय नहीं था । गोरखनाथ जी ने अपने निकटम शिष्यों को आसन सिखाये । उस काल के योगी समाज से बहूत दूर ….पर्वतों एवं जंगलो में रहा करते थे । वहाँ एकांत में तपस्या कर जीवन व्यतीत करते थे । उनका जीवन प्रकृति पर आश्रित था । जानवर योगियों के महान शिक्षक थे …..क्योंकि जानवर को किसी चिकित्सक की आवश्यकता नहीं परती है.प्रकृति ही उनकी एक मात्र सहायक है । 


योगी , ऋषि एवं मुनियों ने जानवरों की गतिविधियों पर ध्यान से विचार कर उनका अनुकरण किया । इस प्रकार वन के जीव-जन्तुओ के अधयन से योग की अनेक विधियों का विकास हुआ है । आज चकित्सक एवं वेज्ञानिक योग के अभ्यास की सलाह देते हैं । योग साधु संतो के लिए नहीं है समस्त मानव समुदाय के लिए आवश्यक है । खास कर छात्र जीवन के लिए बहूत ही आवश्यक है । आज कल छात्रों में पठन – पाठन के प्रति उदासीनता देखी जाती है । उनका मूल कारण उनका स्वस्थ ही है । स्वस्थ शरीर में स्वस्थ शिक्षा का निवास सम्भव है । यह योग से ही संभव है । योग से उसके सारे शरीर के रोगों का निदान होगा । योग का तात्पर्य शरीर को बलशाली बनाना नहीं है। 


बल्कि उसके मन मस्तिष्क को उसके कार्य के प्रति जागरूक करना है । योग से अस्वस्थ शरीर को सक्रिय एवं रचनात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिलती है । यह मन को शक्तिशाली बनता है एवं दुःख दर्द सहन करने की शक्ति प्रदान करता है । दृढ़ता एवं एकाग्रता को शक्ति प्रदान करता है । योग के नियमित अभ्यास से मस्तिष्क शक्तिशाली एवं संतुलन बना रहता है । बिना विचलित हुए आप शांत मन से संसार के दुःख ..चिंताओं ..एवं समस्याओँ का सामना कर सकेंगे । कठनईयां पूर्ण मानसिक स्वस्थ हेतु सीढियाँ बन जाती है । योग का अभ्यास व्यक्ति के शुप्त शक्तियों को जागृत करता है ..और उनमें आत्मविश्वास भरता है । व्यवहार तथा कार्यो से वह दूसरों को प्रेरणा देने लगता है । शिक्षा जगत में योग की शिक्षा बहूत ही आवश्यक है …क्योंकि आज के वर्तमान परिवेश में ज्यादा तर छात्र एवं छात्राएं शारीरिक , मानसिक रूप से अस्वस्थ रहते हैं । 



जिनके कारण उनमें शिक्षा का विकाश जितना होना चाहिए …उतना नहीं हो पा रहा है । फलतः वो लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने में असफल हो जाते हैं …यदि उन्हें जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति करनी है तो योग का अभ्यास आवश्यक है । सामाजिक जीवन में जो नीरस एवं निर्जीव जीवन व्यतीत करते हैं उन्हें भी योग का सहारा लेना चाहिए । खासकर छात्र योग के बल पर अपने मस्तिष्क को शुद्ध करके विचार शक्ति को बढ़ा सकते है । अक्सर देखा जाता है की जीवन के निर्माण के समय छात्र मादक द्रव्यों का सेवन करते हैं …जो कभी उनके लिए लाभकारी नहीं हो सकता हैं । योग के नियमित अभ्यास से उनसे छुटकारा मिल सकता है ..। योग उन्हें अंतिम लक्ष्य तक ले जायेगा …इसके परे कोई लक्ष्य नहीं है । य 



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